बड़ी बहन को अपना लंड चुसाया Part -1 | Family sex story

बड़ी बहन को अपना लंड चुसाया Part -1 | Family sex story

कैसे मैंने अपनी शादी शुदा बहन की चूत चाती और उससे अपना लंड चुसाया

मेरी family sex story में पढ़ें कि एक बार दीदी कुछ दिन के लिए घर आयी तो उनकी हरकतों ने मेरी ठरक जगा दी. मैंने उनको नंगी चूत में उंगली करते देखा.

डियर फ्रेंड्स, मेरा नाम आमिर है. मैं अपनी फैमिली के साथ चेन्नई में रहता हूं.

मेरी फैमिली में मेरी अम्मी (41), अब्बू (48) और मेरी दो बड़ी दीदी रहते हैं. बड़ी वाली दीदी का नाम सना है. उनसे छोटी दीदी नूर है. अब उन दोनों की शादी हो चुकी है.
मेरे अब्बू एक सरकारी विभाग में अफसर हैं.

ये सेक्स कहानी तब की है जब मैं 19 साल का था और मेरी दोनों बहनें क्रमश: 24 और 23 साल की थीं.
मैं तब कॉलेज के दूसरे साल में था और पत्राचार के माध्यम से पढ़ाई पूरी कर रहा था. (Family sex story)

हमारी फैमिली शुरू से ही खुले विचारों की रही है. उस वक्त मेरी दोनों बहनों की शादी हो चुकी थी. नूर दीदी अमेरिका में थी और सना दीदी बैंगलोर में रहती थी.

दोनों की शादी के बाद घर एकदम खाली खाली हो गया था. शादी के पहले हम तीनों एक ही बेडरूम शेयर किया करते थे. अब उनके जाने के बाद वो बेडरूम मेरा हो गया था.

मैं उस बेडरूम में अब आराम से पोर्न मूवी देख सकता था. मैं अक्सर मनोहर कहानियां और काफी सारी अडल्ट मैगजीन लाकर अपने बेड के नीचे रखता था. फिर रात में उनको पढ़ते हुए आराम से मुठ मारा करता था.

फिर मेरे अब्बू ने मुझे जॉब पर लगवा दिया. मैंने कॉमर्स से कोर्स कर रहा था तो अकाउंटेंट की जॉब आराम से मिल गयी थी. अब मैं ऑफिस जाने लगा था.

एक दिन जब मैं जॉब से लौटा तो मेरे अम्मी अब्बू  सो रहे थे. मैं अपने रूम में गया तो बड़ी दीदी वहां पर पहले से ही बैठी थी.
मैंने चौंक कर कहा- दीदी, आप कब आईं?
दीदी- आज सुबह ही आई थी. तू तब तक ऑफिस जा चुका था.

बड़ी दीदी बैंगलोर से मुम्बई आई थी.

मेरी नजर दीदी के बदन पर गयी. उसने एक पारदर्शी नाइटी पहनी हुई थी. उसमें से उसकी ब्रा और पैंटी साफ झलक रही थी.
जैसे ही मैं आगे बढ़ा तो दीदी ने मुझे गले से लगा लिया. मैं भी उनके गले से लगा तो उनके चूचे मुझे मेरे सीने पर महसूस हुए.

आज मुझे दीदी के चूचे टच होने से करंट सा लग रहा था. (Family sex story)
फिर मैंने भी उनको कस कर बांहों में भर लिया और मेरा लंड उनकी चूत वाले एरिया पर उनकी पैंटी के ऊपर सटा दिया.
कुछ ही सेकेण्डस् के अंदर मेरा लौड़ा पूरा तन गया था.

फिर उसने गले से हटाया और बोली- क्या बात है … आज बहुत लेट हो गया तू?
मैंने कहा- हां दीदी, वो आज एक टैक्स रिटर्न फाइल करनी थी तो इसलिए लेट हो गया.
वो बोली- ठीक है, तू नहा ले. मैं तेरे लिए तब तक खाना लगा देती हूं.

मैं उसके बाद फिर नहाने चला गया.

अब मेरे ख्यालों में दीदी का वही सेक्सी बदन घूम रहा था जिसको मैंने कुछ देर पहले पारदर्शी नाइटी के अंदर ब्रा और पैंटी में देखा था.

अंदर जाकर मैं दीदी को सोचकर मुठ मारने लगा.
मुझे अंदर गये हुए काफी टाइम हो गया तो दीदी ने बाहर से पुकारा- क्या बात है आमिर , तुझे इतना टाइम कब से लगने लग गया नहाने में? (Family sex story)

मैं बोला- बस आ रहा हूं दीदी.
मैंने मुठ पूरी भी नहीं मारी और माल निकाले बिना ही मैं नहाकर बाहर आ गया.

रात में शॉवर लेने के बाद मैं अंडरवियर नहीं पहनता हूं. मेरी हमेशा से यही आदत रही है.

फिर मैं बाहर आया और मैंने कॉटन की एक ट्रैक पैंट पहन ली.

मेरी पैंट में मेरा लंड अभी भी तनाव में था. मेरा लंड मेरी ट्रैक पैंट में से भी साफ दिख रहा था.
मुझे लगा कि दीदी लंड देख लेगी तो मैं जल्दी से आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया.

दीदी पहले से ही वहां बैठी हुई मेरा इंतजार कर रही थी.

मगर मेरे बैठने से पहले ही सना दीदी ने मेरे लंड के उभार को देख लिया था.
उसने कुछ रिएक्ट नहीं किया. (Family sex story)

जब वो खाना परोसने लगी तो उसकी नाइटी के ऊपर वाले दो बटन मैंने खुले हुए देखे जिनमें से दीदी की चूचियां झांक रही थीं.
उनके चूचों के बड़े बड़े उभार साफ नजर आ रहे थे.

दीदी के चूचों को देखकर मेरा लंड फिर से मुंह उठाने लगा.
मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.

फिर वो मेरे सामने ही बैठ गयी.

कुछ देर बाद वो बोली- तुझे और कुछ चाहिए है क्या?
मैंने कहा- हां, मुझे एक गिलास पानी दे दो दीदी.

वो मेरे लिये पानी का गिलास लेकर आई.

जब वो गिलास रखने लगी तो उसकी चूचियों का क्लीवेज मुझे साफ नजर आया.

उसने मेरी पैंट में उठे मेरे लंड को देख लिया.
मेरा एक हाथ मेरे लंड पर था और मेरी नजर दीदी की चूचियों पर थी.
उसने देख लिया था कि मैं भी उसकी चूचियों को घूर रहा हूं.

फिर वो मेरे सामने जाकर बैठ गयी.

कुछ देर बाद उसने फिर से पूछा- और कुछ चाहिए?
मैं- नहीं दीदी, बस!
दीदी- क्या बात है, आजकल तू खाना भी कम ही खाने लगा है.
मैं- नहीं दीदी, रात में पढ़ना होता है इसलिए इस टाइम कम ही खाता हूं. (Family sex story)

वो बोली- ठीक है, तो मैं तेरा बचा हुआ खाना फ्रिज में रख देती हूं.
वो उठी और बाकी बचा हुआ खाना फ्रिज में रख आई.

फिर वो हमारे रूम में चली गयी.
चूंकि घर में एक ही रूम था और मम्मी पापा हॉल में सोते थे. पहले हम तीनों भाई बहन इसी रूम में सोते थे.

बहनों की शादी के बाद मैं रूम में अकेला रहने लगा था.
मगर जब भी घर में कोई बाहर से आता या मेरी दीदी लोग आते तो उसी रूम में सोया करते थे.
इसलिए दीदी को भी आज उसी रूम में सोना था क्योंकि वो कमरा हम तीनों का ही था.

फिर मैंने अपना खाना खत्म किया और हाथ धोकर अपनी किताब उठा ली.

मैं किचन में ही बैठकर पढ़ने लगा क्योंकि रूम में दीदी पहले से जाकर लेट गयी थी.
रात के 12 बजे तक मैं किचन में ही बैठकर पढ़ता रहा. (Family sex story)

जब मुझे बहुत नींद आने लगी तो मैं किचन की लाइट बंद करके रूम में चला गया.
मैं बिना आवाज किये रूम के पास पहुंचा और धीरे से दरवाजा खोला क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि दीदी जाग जाये.

जब मैंने दरवाजा खोलकर अंदर झांका तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गयी.
सना दीदी की नाइटी उनके चेहरे पर पड़ी हुई थी और वो अपनी चूत में दो उंगलियां डालकर अंदर बाहर कर रही थी.

दीदी की 36 की साइज की चूची जो बिल्कुल गोरी थी, मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी.

इस हाल में दीदी को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैं अपनी आंखें फाड़कर दीदी की चूत की तरफ देख रहा था.

चूंकि दीदी की आंखें उनकी नाइटी के नीचे ढकी हुई थी तो वो मुझे देख नहीं सकती थी.

वो अपनी उंगलियों से अपनी चूत को चोदे जा रही थी.
मैं वहीं पर खड़ा होकर अपने लंड को मसलने लगा. (Family sex story)

मेरा मन कर रहा था कि मैं ही अपना लंड दीदी की चूत में डाल दूं और उसकी चूत की प्यास मिटा दूं.

मगर मैं हिम्मत नहीं कर पाया और वहीं पर खड़ा रहकर अपने लंड को मसलने लगा.

कुछ देर तक दीदी तेजी से अपनी चूत में उंगली चलाती रही और अपनी चूत के दाने को जोर जोर से रगड़ती रही.
फिर एकदम से उसकी चूत से पानी निकला और एक लम्बी आह्ह … के साथ दीदी शांत होती चली गयी.

जब उसने आंखें खोलीं तो मुझे सामने देखकर वो हैरान हो गयी.
वो शर्म से उठी और चुपचाप बाथरूम में जाने लगी.

मगर उसकी नजर मेरे तने हुए लंड पर थी जिसको वो घूरते हुए जा रही थी.

फिर वो बाथरूम में घुस गयी.
मैं बेड पर लेट गया.

मगर मेरे अंदर हवस भरी हुई थी; मेरा लंड खड़ा ही रहा. (Family sex story)

आज जो नजारा मैंने देख लिया था उसके बाद तो मुझे चैन नहीं आने वाला था.

बीस मिनट हो गये. दीदी अभी तक बाहर नहीं आई थी.

मैं बेड पर लेटा हुआ दीदी के बाहर आने का इंतजार कर रहा था.
मेरी नजर बाथरूम के दरवाजे पर ही लगी हुई थी.

वो कुछ देर के बाद बाहर निकली तो मैं जाग रहा था.

दीदी- तू अभी तक सोया नहीं है क्या?
मैं- नींद नहीं आ रही थी.
दीदी- कल ऑफिस नहीं जाना है क्या?

मैं- नहीं, कल मेरी छुट्टी है.
दीदी- तो क्या पढ़ रहा था अभी तक?
मैं- इकोनॉमिक्स की किताब पढ़ रहा था. आपसे एक बात पूछूं? (Family sex story)

दीदी- हां पूछो.
मैं- अभी जो आप कर रही थी वो क्या था?
दीदी- वो मैं तुझे बाद में बताऊंगी.
मैं- अभी क्यों नहीं बता सकती?

दीदी- तू भी तो जवान हो गया है. तेरी भी तो गर्लफ्रेंड होगी. तुझे भी तो पता होगा ये सब!
मैं- हां है मेरी गर्लफ्रेंड, लेकिन मैंने उसको कभी ऐसे करते नहीं देखा.
दीदी- कितनी गर्लफ्रेंड हैं तेरी?
मैं- एक ही है।

वो बोली- कभी उसके साथ कुछ किया है तूने?
मैं- उसके साथ तो कुछ नहीं किया है, हां मगर मेरे ऑफिस की एक कुलीग (सहकर्मी) है जिसके साथ मैंने ऑफिस में सेक्स किया है. (Family sex story)

दीदी- वाह … गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स किया नहीं और अपनी ऑफिस की लड़की से सेक्स कर लिया!
मैं- दीदी, उसका पति मर्चेंट नेवी में है. वो उसको समय नहीं दे पाता है.
दीदी- अच्छा।

मैं- दीदी एक बात बोलूं?
दीदी- हां बोल.
मैं- आपकी चूत से बड़ी चूत थी उस ऑफिस वाली लड़की की. आपकी चूत में तो दो उंगली भी बहुत मुश्किल से जा रही थी.

दीदी- अच्छा … तो तूने मेरी चूत का साइज भी देख लिया? (Family sex story)
मैं- हां, तो आप भी तो दोनों टांगें खोलकर सामने ही उंगली कर रही थीं. सामने से सब कुछ दिख रहा था.

दीदी- सच बता तूने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है?
मैं- बस एक के साथ ही.

वो बोली- कितनी बार सेक्स किया है उसके साथ?
मैं- 6 से 7 बार किया है दीदी.
दीदी- उसके घर में कौन कौन है?

मैं- वो और उसका पति ही हैं. वो मर्चेंट नेवी में है और 6 महीने में एक बार ही घर आता है.
दीदी- हम्म … ठीक है। (Family sex story)

फिर मैं बोला- दीदी, आपके बूब्स तो बहुत प्यारे हैं.
दीदी- तूने मेरे बूब्स कब देख लिये?
मैं- जब आप खाना परोस रही थी तो उस समय झुकते हुए मुझे आपकी चूची दिख गयी थी.

वो बोली- तू बहुत बदमाश हो गया है.
मैं- आप भी तो बहुत खूबसूरत हो गयी हो.
दीदी- हां हां पता है. तू भी तो जवान हो गया है. (Family sex story)

मैं- वो कैसे?
दीदी- तेरी पैंट में बने टैंट से पता लग जाता है.
मैं- ओह्ह … तो आपने भी मेरा टैंट देख लिया है!

दीदी- तेरे टैंट को देखकर मेरे जिस्म में आग लग गयी थी. मैं यहां बेड पर लेटी हुई उसी आग को शांत कर रही थी.
मैं- और जो आग मेरे अंदर लगी हुई है उसका क्या?
दीदी- अपना हाथ जगन्नाथ! बाथरूम में जाकर हिलाकर आ जा!

मैं- दीदी, आप ही अपने हाथ में लेकर हिला दो ना मेरे इस लंड को? (Family sex story)
दीदी- तेरा दिमाग खराब हो गया है.
मैं- क्यूं दीदी, लंड देखकर आप अपनी चूत में उंगली कर सकते हो लेकिन उसी लंड को अपने हाथ में लेकर नहीं हिला सकते?

दीदी- अगर किसी ने गलती से भी देख लिया तो बहुत बदनामी होगी. हम भाई बहन हैं, न कि पति-पत्नी!
मैं- मगर पति के साथ भी तो आप करती होगी. मेरे साथ करने में क्या दिक्कत है. वैसे भी यहां कौन देखने वाला है, हम लोग अपने ही घर में हैं. अपने ही रूम के अंदर हैं. हम कुछ भी कर सकते हैं. आओ ना दीदी … प्लीज। (Family sex story)

ये कहते हुए मैंने दीदी का हाथ पकड़ लिया और अपनी ट्रैक पैंट पर रखवा दिया.

दीदी मेरी ट्रैक पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगी.
उसने एक दो बार सहलाया और फिर से हाथ हटा लिया.

मैं बोला- अब क्या हुआ?
दीदी- मुझे शर्म आ रही है कुत्ते. बहुत बेशर्म हो गया है तू!
मैं- लंड को देखते हुए तो आपको शर्म नहीं आ रही थी. वही तो लंड है ये.

अब मैंने एक बार फिर से दीदी का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रखवा दिया.

अबकी बार उसने हाथ नहीं हटाया और मेरे लंड को मेरी ट्रैक पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी.
दीदी के कोमल हाथ का स्पर्श पाते ही मेरा लंड एकदम से टाइट हो गया.

मेरे लंड की गर्मी दीदी मेरी ट्रैक पैंट के ऊपर से ही महसूस कर रही थी. (Family sex story)
कुछ देर वो मेरे लंड को सहलाती रही.

मेरा लंड ऐसा सख्त हो गया था जैसे वो हड्डी का बना हुआ हो. बहुत ज्यादा कठोर हो गया था.

फिर दीदी ने मेरी ट्रैक पैंट के अंदर हाथ डाल दिया.
अब मेरा लंड दीदी के हाथ में था.

Family sex story

वो उस समय काफी मस्ती में लग रही थी.
मैंने देखा कि अब दीदी की आंखें बंद हो गयी थीं.
वो मेरे लंड को पकड़ने का पूरा मजा ले रही थी.

मैंने अपना एक हाथ दीदी के दायें बूब्स पर रख दिया और हल्के से दबा दिया.
दीदी के मुंह से आह्ह … की आवाज निकली जिसने मुझे और गर्म कर दिया.
मैंने अपना दूसरा हाथ भी दीदी के बूब्स पर रख दिया और दबाने लगा.

अब हम दोनों एक साथ ही एक दूसरे को गर्म कर रहे थे. (Family sex story)

कुछ देर के बाद मैंने दीदी की नाइटी उसके सिर पर से निकाल दी.
अब दीदी के बदन पर ब्रा और पैंटी थी.

मैंने उन दोनों को भी निकलवा दिया और उसको पूरी की पूरी नंगी कर दिया.

वो मेरे सामने नंगी लेट गयी और मुझे मेरी ट्रैक पैंट की ओर इशारा किया.
मैंने भी अपनी लोअर निकाली और पूरा नंगा होकर दीदी के पास चला गया.

दीदी मेरे बेड पर पूरी नंगी पड़ी हुई थी और उसका गोरा नंगा बदन बल्ब की नूर में बहुत ही आकर्षक लग रहा था.

मेरे लंड में जोर जोर से झटके लग रहे थे.
मैं चाहता था कि मैं दीदी के मुंह में लंड देकर चुसवाऊं.

अपनी ऑफिस की लड़की की चुदाई करते हुए भी मैं उससे बहुत समय तक अपना लंड मुंह में देकर ही चुसवाया करता था.
मुझे लंड को मुंह में देकर चोदने में बहुत मजा आता था.

फिर मैंने अपने लंड को दीदी के मुंह के पास कर दिया तो दीदी मना करने लगी. (Family sex story)
उसने मेरे लंड को चूसने से मना कर दिया.

मगर मैंने रिक्वेस्ट की और फिर लंड को उसके होंठों पर टच करने लगा.
उसको थोड़ा अच्छा लगा.

अब दीदी ने अपना मुंह खोल दिया और मैंने अपना लंड दीदी के मुंह में दे दिया.
दीदी मेरे लंड को मस्त होकर चूसने लगी.

जिस तरह से दीदी मेरे लंड को चूस रही थी उसको देखकर लग रहा था कि उसको लंड चूसना बहुत अच्छा लगता है.
मुझे पता था कि दीदी मेरे जीजू का लंड भी बहुत मजा लेकर चूसती होगी.

मेरा हाथ अब दीदी की चूत पर पहुंच गया.
ऊपर की ओर दीदी मेरे लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी और नीचे मैं उसकी चूत को अपने हाथ से सहला रहा था.

दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और चूत बिल्कुल ही साफ थी.

फिर मैं दीदी के मुंह में लंड दिये हुए उसके बगल में ही लेट गया. (Family sex story)
मैंने अपने हाथों की उंगलियों से दीदी की चूत की दोनों फांकों को फैला दिया और मैं उसमें जीभ डालकर चाटने लगा.

जब मैंने जीभ दीदी की चूत में दी तो पता लगा कि दीदी की चूत पहले से ही अंदर से गीली हुई पड़ी थी.
मैं दीदी की चूत के रस को चाटने लगा.

जैसे जैसे मैं चूत को चाटकर साफ करता था वैसे ही दीदी की चूत और ज्यादा रस छोड़ देती थी.
मैं बार बार चाट रहा था और फिर से रस निकल आ रहा था.
मुझे ऐसा करते हुए बहुत मजा आ रहा था.

दीदी अब जोश में आती जा रही थी.
उसकी चूत में मेरी जीभ खलबली मचा रही थी.

वो मेरे लंड को अब और जोर जोर से चूसने लगी थी.
कुछ ही देर में दीदी अपनी चूत को मेरे मुंह पर धकेलने लगी थी. (Family sex story)

एक हाथ से उसने मेरे लंड को पकड़ कर मुंह में लिया हुआ था और दूसरे हाथ से वो अब मेरे सिर को पकड़ कर चूत की ओर धकेलते हुए अपनी चूत पर दबा रही थी जिससे मेरी जीभ दीदी की चूत के अंदर और अंदर तक घुस जाती थी.

मैं भी जैसे दीदी की चूत को खा जाना चाहता था.
दीदी मेरे लंड को बहुत तेजी से चूस रही थी और मुझसे अब कंट्रोल नहीं हो पा रहा था.

कुछ देर के बाद दीदी ने मेरे लंड को मुंह से निकाल दिया और बोली- मैं झड़ने वाली हूं आमिर !
मैंने भी हांफते हुए कहा- मेरे मुंह में ही झड़ जाओ दीदी.

फिर दीदी ने दोबारा से मेरे लंड को मुंह में भर लिया और तेजी से चूसने लगी.
मैं भी दीदी की चूत को दोगुनी तेजी के साथ चाटने लगा.
कुछ पल के बाद ही दीदी ने मेरे सिर को अपनी चूत पर जोर से धकेला और उसकी चूत से पानी छूटने लगा.

दीदी की चूत का पानी मेरे मुंह में जाने लगा.
मैं दीदी की चूत का गर्म गर्म रस पीकर और ज्यादा कामुक हो गया.

सना दीदी के बदन में झटके लग रहे थे.
उसने बहुत सारा पानी छोड़ा और मैंने उसकी चूत का सारा रस चाट चाटकर साफ कर दिया.

मेरे लंड को चूसने की स्पीड अब दीदी ने कम कर दी और उसका पूरा बदन पसीने में हो गया. (Family sex story)
फिर मैं उठा और जोर जोर से दीदी के मुंह को चोदने लगा.

अब मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने दीदी से पूछा- कहां पर निकालना है?
तो दीदी ने भी लंड को मुंह से निकाल कर कहा- मेरे मुंह में ही गिरा दो.

फिर मैं तेजी से दीदी के मुंह को लंड से चोदने लगा और मेरा माल भी दीदी के मुंह में गिरने लगा.
मैं भी झड़कर शांत हो गया.

उसके बाद हम दोनों ही ढीले पड़ गये और आराम से बेड पर लेट गये.
दीदी मेरी लेफ्ट साइड पर लेटी हुई थी.

मैंने दीदी के कान में धीरे से कहा- आप बहुत गर्म हो दीदी. आपकी चूत से बहुत ही मस्त खुशबू आती है. जीजू तो बहुत किस्मत वाले हैं जो उनको आपकी चूत रोज चाटने के लिए मिलती है. वो तो पूरी उम्र आपकी चूत के मजे ले सकते हैं. (Family sex story)

वो मेरी तरफ देखकर बोली- तुम्हारे जीजू को मेरी चूत चाटने में कोई इंटरेस्ट नहीं है. उसने कभी भी मेरी चूत नहीं चाटी है. वो दस मिनट से ज्यादा कभी नहीं कर पाता है. आज तक वो अपना लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में उतार भी नहीं पाया है.

ये सुनकर मैं दीदी की ओर देखने लगा.
दीदी ने मेरी तरफ देखा और फिर अपनी पलकें झपकाते हुए मेरे गाल पर किस कर दिया.
मुझे बहुत अच्छा लगा और फिर मैंने दीदी के गाल पर किस कर दिया.

उसके बाद मैंने दीदी के होंठों पर अपने होंठ रख दिये.

कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे और फिर धीरे धीरे हम दोनों गर्म होने लगे.

मेरा हाथ दीदी की चूत पर पहुंच गया.
दीदी का हाथ भी मेरे लंड पर आ गया था, वो मेरे लंड को सहलाने लगी.

मैं अब दीदी के बूब्स को छेड़ते हुए उसकी चूत को सहलाने लगा.
अब वो सिसकारने लगी थी. (Family sex story)

फिर मैंने दीदी की चूत में उंगली अंदर डाल दी और चूत में चलाने लगा.
एकदम से दीदी के मुंह से निकला- आह्ह … आमिर थोड़ा धीरे कर!

मैंने दीदी की चूत में अपनी उंगलियां अंदर बाहर करना चालू रखा.
मुझे अब दीदी की चूत में उंगलियों से चोदने में ज्यादा ही जोश चढ़ रहा था.
मैं तेजी से उसकी चूत में उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा.

दीदी के मुंह से निकल रही दर्द भरी सिसकारियां सुनकर मैं और तेजी से दीदी की चूत को कुरेदने लगा और वो देखते ही देखते बहुत गर्म हो गयी.
दीदी का हाथ अब मेरे लंड पर तेज तेज चल रहा था. (Family sex story)

जब दीदी से रहा न गया तो दीदी बोली- आह्ह … आमिर .. ऊईई … अब मेरी चूत में लंड डाल और मेरी चूत में लगी आग को शांत कर। मेरे पूरे बदन में सेक्स की आग लगी हुई है. मुझे चोदकर शांत कर दे आमिर … मेरी चूत की आग को लंड के पानी से बुझा दे.

मुझे भी दीदी को ऐसी चुदासी हालत में देखकर मजा आ रहा था और मैं उसकी चूत चोदने के लिए तैयार हो गया.
इसके बाद क्या हुआ? वो अगले भाग में!

मेरी family sex story  पर कमेंट्स में अपनी राय देना न भूलें.  मुझे ईमेल पर मैसेज भी कर सकते हैं
[email protected] (Family sex story)

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